*व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता ओर कृपा प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
*वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
*व्यतिपात योग मतलब क्या?.. देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए नाराज हुए, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना याद नही थोडा भूल कर रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाया है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
*विशेष ~ 10 फरवरी 2021 बुधवार को सुबह 07:03 से 11 फरवरी प्रातः 05:09 तक (यानी 10 फरवरी पुरा दिन) व्यतीपात योग है।*
चिराग महाराज
No comments:
Post a Comment