Shastriji

Wednesday, 17 February 2021

गणेश जी बुद्धिमान कैसे हुए

जैसे की हम सब जानते हैं की जगत में अंधकार हो गया था सूरज नहीं निकलने वाला था सब देवी देवता हैं परेशान हो गए टाइम पर सूर्य देवता नहीं निकलेंगे तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा और सब जीव जंतु मनुष्य सोए रहेंगे किसी को पता नहीं चलेगा सवेरा हुआ कि नहीं इसकी वजह से जीवन चक्र खराब हो सकता है कहानी कुछ ऐसी थी कि सूर्य देवता को हनुमान जी ने निगल लिया था कुछ श्राप की वजह से

उस टाइम गणपति जी ने दीया जला के पूरे ब्रह्मांड में उजाला किया और अपनी बुद्धि का प्रदर्शन किया इससे सब उठ गए सबको लगा दिन हो गया और जीवन चक्र सही चल रहा था यह करतब देखकर सब देवी देवता ने गणपति जी को बुद्धिमान कहा गणपति जी बहुत बुद्धिमान है

चिराग महाराज

गणपति जी धनवान कैसे हैं जानते हैं

तो जैसे हम जानते हैं की गणेश जी कुबेर भंडारी के वहां खाना खाने के लिए गए और उसके अहंकार को तोड़ दिया और धन के अभिमान वाले कुबेर भंडारी का अहंकार टूट गया तो इससे पता चलता है कि अगर कोई धन से विघ्न डालें तो गणपति जी उस को पराजित कर सकते हैं इसीलिए धन श्री गणेश जी को पराजित नहीं कर सकता और मां लक्ष्मी की गणेश जी पर सदैव कृपा बनी रही है तो इससे हमें पता चलता है की गणेश जी की प्रथम पूजा करने से और हमारे प्रसंग में उत्सव में त्यौहार में हमारे साथ रहे तो कोई हमें धन से हमारे कार्य को खराब नहीं कर सकता इससे पता चलता है की गणेश जी हमारे साथ रहेंगे तो कोई हमे परेशानी कर सकता
चिराग महाराज

Tuesday, 16 February 2021

जानें- बीमारियों का ग्रहों और किस्मत से क्या है संबंध?


*ग्रहों का व्यक्ति के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ता है. ग्रह कई बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. आइए जानते हैं किस ग्रह की वजह से कौन सी बीमारी हो सकती है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए.*
*शरीर में कुल मिलाकर पांच तत्व और तीन धातुएं होती हैं. ये पांचों तत्व और तीनों धातुएं 9 ग्रहों से नियंत्रित होती हैं. जब कोई तत्व या धातु कमजोर होती है, तब शरीर में बीमारियां बढ़ जाती हैं. छोटी हो या बड़ी, हर बीमारी इन 9 ग्रहों से संबंध रखती है. इनसे संबंधित ग्रहों को ठीक करके हम शरीर की बीमारियों को दूर कर सकते हैं.*
सूर्य और इसकी बीमारियां
- सूर्य ग्रहों का राजा है.
- हर ग्रह की शक्ति के पीछे सूर्य ही होता है.
- सूर्य के कारण हड्डियों की और आंखों की समस्या होती है.
- ह्रदय रोग, टीबी और पाचन तंत्र के रोग के पीछे सूर्य ही होता है.
उपाय
- प्रातः जल्दी सोकर उठें.
- नित्य प्रातः सूर्य को जल अर्पित करें.
- भोजन में गेंहू की दलिया जरूर खाएं.
तांबे के पात्र से जल पीएं.
चंद्रमा और इसकी बीमारियां
- चंद्रमा व्यक्ति के मन और सोच को नियंत्रित करता है.
- इसके कारण व्यक्ति को मानसिक बीमारियां होती हैं.
- व्यक्ति को चिंताएं परेशान करती रहती हैं.
- नींद, घबराहट, बेचैनी की समस्या हो जाती है.
उपाय
- देर रात तक जागने से बचें.
- पूर्णिमा या एकादशी का उपवास रखें.
- चंद्रप्रभस्वामि भगवान  जी की उपासना करें.
- चांदी का छल्ला या चांदी की चेन धारण करें.
*मंगल की बीमारियां
- मंगल मुख्य रूप से रक्त का स्वामी होता है.
- यह रक्त और दुर्घटना की समस्या देता है.
- यह उच्च रक्तचाप और बुखार के लिए भी जिम्मेदार होता है.
- यह कभी कभी त्वचा में इन्फेक्शन भी पैदा कर देता है.
उपाय
- मंगलवार का उपवास रखें.
- चीनी खाने के बजाय गुड़ का सेवन करें.
- जमीन पर या लो फ्लोर के पलंग पर सोएं.
 घड़े का जल पीना अद्भुत लाभकारी होगा.
बुध और इसकी बीमारियां
- बुध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का स्वामी होता है.
- इसके कारण इन्फेक्शन वाली बीमारियां होती हैं.
- यह कान नाक गले की बीमारियों से संबंध रखता है.
- इसके अलावा त्वचा के रोग भी बुध के कारण ही होते हैं.
उपाय
- भोजन में सलाद और हरी सब्जियों का प्रयोग करें.
- कुछ देर उगते हुए सूर्य की रौशनी में बैठें.
- प्रातःकाल खाली पेट तुलसी के पत्तों का सेवन करें.
महादेव भगवान  मंत्र का जप भी विशेष लाभकारी होता है.
*बृहस्पति की बीमारियां
- यह व्यक्ति को स्वस्थ भी रखता है.
- साथ ही गंभीर बीमारियां भी देता है.
- कैंसर, हेपटाइटिस और पेट की गंभीर बीमारियां यही देता है.
- यह आमतौर पर छोटी मोटी बीमारियां नहीं देता.
उपाय
- प्रातःकाल सूर्य को हल्दी मिलाकर जल अर्पित करें.
- शुद्ध सोने का छल्ला तर्जनी अंगुली में धारण करें.
- हल्दी का तिलक अवश्य लगाएं.

चिराग महाराज

दक्षिणा का महत्व क्या है

*दक्षिणा का महत्व*
ब्राह्मणों की दक्षिणा हवन की पूर्णाहुति करके एक मुहूर्त ( 24 ) मिनट के अन्दर दे देनी चाहिये , अन्यथा मुहूर्त बीतने पर 100  गुना  बढ जाती है , और तीन रात बीतने पर एक हजार , सप्ताह बाद दो हजार ,महीने बाद एक लाख , और  संवत्सर बीतने पर तीन करोड गुना यजमान को देनी होती है । यदि नहीं दे तो उसके बाद उस यजमान का  कर्म निष्फल हो जाता है , और  उसे ब्रह्महत्या लग जाती है , उसके हाथ से किये जाने वाला हव्य - कव्य देवता और पितर कभी प्राप्त नहीं करते हैं । इसलिए  ब्राह्मणों की दक्षिणा जितनी जल्दी हो देनी चाहिये ।
यह जो कुछ भी कहा है सबका शास्त्रोॆ में प्रमाण है ।
मुहूर्ते समतीते तु , भवेच्छतगुणा च सा ।
त्रिरात्रे तद्दशगुणा , सप्ताहे द्विगुणा मता ।।
मासे लक्षगुणा प्रोक्ता ,ब्राह्मणानां च वर्धते ।
संवत्सर व्यतीते तु , त्रिकोटिगुणा भवेत् ।।
कर्म्मं तद्यजमानानां , सर्वञ्च निष्फलं भवेत् ।
सब्रह्मस्वापहारी च , न कर्मार्होशुचिर्नर: ।।
इसलिए चाणक्य ने कहा """नास्ति यज्ञसमो रिपु: """ मतलब यज्ञादि कर्म विधि से सम्पन्न हो तब लाभ अन्यथा सबसे बडे शत्रु की तरह है ।
गीता में स्वयं भगवान ने कहा 
विधिहीनमसृष्टान्नं , मन्त्रहीनमदक्षिणम् ।
श्रद्धाविरहितं यज्ञं , तामसं परिचक्षते ।।
बिना सही विधि से बनाया भोजन जैसे परिणाम में नुकसान करता है , वैसे ही ब्राह्मण के बोले गये मन्त्र दक्षिणा न देने पर नुकसान करते हैं ।
शास्त्र कहते हैं लोहे के चने या टुकडे भी व्यक्ति पचा सकता है परन्तु ब्राह्मणों के धन को नहीं पचा सकता है ।किसी भी उपाय से ब्राह्मणों का धन लेने वाला हमेशा दु:ख ही पाता है । इस पर एक कहानी सुनाता हूँ शास्त्रों में वर्णित 
 महाभारत का युद्ध चल रहा था , युद्ध के मैदान में सियार , आदि हिंसक जीव  योद्धाओं के गरम -२ खून को पी रहे थे , इतने में ही धृष्टद्युम्न ने तलवार से पुत्रशोक से दु:खी निशस्त्र द्रोणाचार्य की गर्दन काट दी । तब द्रोणाचार्य के गरम -२ खून को पीने के लिए सियारिन दौडती है , तो सियार अपनी सियारिन से कहता है 
प्रिये  """ विप्ररक्तोSयं गलद्दगलद्दहति """ 
यह ब्राह्मण का खून है इसे मत पीना , यह शरीर को गला- गला कर नष्ट कर देगा । तब उस सियारिन ने भी ब्राह्मण द्रोणाचार्य का रक्तपान नहीं किया ।
ऋषि - मुनियों का कर के रुप में खून लेने पर ही रावण के कुल का संहार हो गया ।इसलिए जीवन में कभी भी ब्राह्मणों के द्रव्य का अपहरण किसी भी रुप में नहीं करना चाहिये ।
वित्तशाट्ठ्यं न कुर्वीत, सति द्रव्ये फलप्रदम ।
अनुष्ठान , पाठ - पूजन जब भी करवायें ब्राह्मणों को उचित दक्षिणा देनी चाहिये , और दक्षिणा के अतिरिक्त उनके आने - जाने का किराया आदि -२ पूछकर अलग से देना चाहिये । 
उसके बाद विनम्रता से ब्राह्मणों की वचनों द्वारा भी सन्तुष्टि करते हुए आशीर्वाद देना चाहिये , ऐसा करने पर ब्राह्मण मुँह से नहीं बल्कि हृदय से आशीर्वाद देता है , और तब यजमान का कल्याण होता है ।
यत्र भुंड्क्ते द्विजस्तस्मात् , तत्र भुंड्क्ते हरि: स्वयम् ।।

 जिस घर में इस तरह श्रद्धा से ब्राह्मण भोजन करवाया जाता है , वहाँ ब्राह्मण के रुप में स्वयं भगवान ही भोजन करते हैं । इत्यलम् - बहुत बडा हो जायेगा । धन्यवाद , पढें और आचरण भी करे ।*
जय महादेव
चिराग महाराज

Monday, 15 February 2021

गणपति जी बलवान क्यों है

जय श्री गणेश हम सब जानते हैं की जब भगवान श्री गणेश का मस्तक लगाया गया उस टाइम मां पार्वती ने गणेश जी को शक्तिशाली बनाने का वरदान मांगा तब सब देवी देवताओं ने हर तरह के शक्ति प्रदान की गई जिसकी वजह से गणपति जी को कोई परेशान ना करें और प्रथम पूजनीय और विघ्नहर्ता बने ऐसे गणपति जी हर तरक्की शक्ति उसके पास है इससे वह हर शक्ति के साथ युद्ध कर सकते हैं और उसे पराजित कर सकते हैं

चिराग महाराज

Saturday, 13 February 2021

गणेश जी गुणवान कैसे हैं

जय श्री गणेश
जैसे कि हम जानते हैं गणपति जी 5 गुणों से संपन्न है उसमें हम प्रतिष्ठावान कैसे हैं
इसके बारे में हम जान चुके हैं और आगे हम जानेंगे गणेश जी गुणवान कैसे हैं तो देखते हैं गणपति जी गुणवान कैसे हुए

जब कोई ऋषि मुनि ब्रह्मर्षि वेदव्यास भृगु ऋषि ऐसे कई महान ऋषि-मुनियों ने कई सारे शास्त्र देखें वेद लिखे उपनिषद लिखें संहिता लिखी ज्ञान और विज्ञान के बारे में बहुत कुछ लिखा

उस टाइम गणेश जी राइटर थे
लिखने सब जगह गणेश जी जाते थे तो इससे गणेश जी सब ज्ञान और विज्ञान के बारे में जानते हैं यानी कि सबका अदनान गणेश जी के पास है इसलिए वह ज्ञानी कहलाएंगे
इसलिए गणेश जी गुणवान भी है

चिराग महाराज

Friday, 12 February 2021

गणेश प्रतिष्ठावान है

प्रतिष्ठावान

गणेश जी प्रतिष्ठान इसलिए है की जब माता पार्वती स्नान कक्ष में थी और भगवान शिव जब आए तो गणेश जी ने मना किया कि आप अंदर नहीं जा सकते मेरी मां स्नान कर रही है और उसने किसी को अंदर प्रवेश करने के लिए मना किया है तब भगवान शिव को गुस्सा आया और गणेश और भगवान शिव के बीच युद्ध हुआ और भगवान शिव ने गणेश जी का मस्तक धड़ से अलग कर दिया और माता पार्वती ने भगवान को सजीवन करने की मांग की उस टाइम भगवान ने नंदी को भेजा नंदी जी गज का सर लेकर आए और भगवान शिव ने हाथी का सर लगाया मां पार्वती ने कहा अब इसकी शादी कैसे होगी सब उसको चढ़ाएंगे परेशान करेंगे सबसे अलग दिख रहा है तब भगवान शिव ने कहा सती महेश को वरदान देता हूं सबसे प्रथम पूजनीय आपका बेटा बनेगा मुझसे भी पहले उसकी पूजा होगी अब आप खुश होंगे इस तरह भगवान गणपति प्रथम पूजनीय हुए और सब अच्छे काम में सबसे पहले उसे न्योता दिया जाता है इस वजह से गणपति जी प्रतिष्ठा वान है जय श्री गणेश

चिराग महाराज

Thursday, 11 February 2021

जय श्री गणेश


जय श्री गणेश हम जानते हैं कि गणेश जी की प्रथम पूजा होती है वे क्यों होती है इसके बारे में हमें ज्यादा पता नहीं होता है चलो हम जाने की कोशिश करते हैं कि गणेश जी प्रथम पूजनीय क्यों हैं.

गणेश जी पांच गुणों के अधिपत्य है इसलिए गणपति जी की प्रथम पूजा होती है

प्रतिष्ठावान
गुणवान
बलवान
धनवान
बुद्धिमान

अब यह पांच गुण उसे कैसे प्राप्त हुए और उसके अंदर कैसे हैं वह हम जानेंगे 
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जय श्री गणेश
चिराग महाराज

Wednesday, 10 February 2021

જય શ્રી ગણેશ પ્રથમ પુજનીય શાં માટે જાણો


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શનિ મહારાજની કૃપા કઈ રીતે થાય

સ્મશાનમાં જયારે મહર્ષિ દધીચિના અંતિમ સંસ્કાર થઈ રહ્યા હતા તો એમના પત્નિ વિયોગ સહન ના કરી શક્યા અને  પાસે વિશાળ પીપળાના ઝાડ નીચે તેમના ત્રણ વર્ષના પુત્રને  મૂકીને સળગતી ચિતામાં  બેસીને સતી થઈ ગયા  પીપળાના ઝાડ નીચે ભુખથી રડતુ બાળક પીપળાના નીચે પડેલા  પાન, ને ફળ ખાઈને દિવસો પસાર કરવા લાગ્યુ અને ધીમે ધીમે પીપળાને જ ઘર માની ને મોટુ થવા લાગ્યો,એક દિવસ  દેવર્ષિ નારદ ત્યાથી નીકળ્યાં  ને બાળકને પૂછ્યું કે તું કોણ છો?  બાળક કહે એ જ તો હું જાણવા માંગુ છું. 
નારદજી:  તારા માતા પિતા કોણ છે?
બાળક કહે એ પણ ખબર નથી  તમે મને કૃપા કરી ને બતાવો  ત્યારે નારદજી એ ધ્યાન ધરીને  કહ્યું કે બાળક તું મહાન દાનવીર મહર્ષિ દધીચિનો પુત્ર છો, તારા પિતાની અસ્થિમાંથી જ વજ્ર  બનાવીને દેવોએ અસુરો પર વિજય મેળવ્યો હતો તારા પિતાનુ 31 વર્ષની ઉંમરમાં મૃત્યુ થયું હતું,
બાળક :  મારા પિતાના મૃત્યુનું કારણ શું હતુ? 
નારદજી:  તારા પિતા પર શનિદેવની મહાદશા હતી,  જે પણ કંઈ તારી સાથે થયુ તે શનિદેવની મહાદશાને કારણે થયું. નારદજીએ બાળકનું નામ  પીપ્લાદ રાખીને જતા રહ્યા. પીપ્લાદે નારદજીના કહેવા પ્રમાણે  બ્રહ્માજીનું ઘોર તપ કર્યુ બ્રહ્માજી પ્રસન્ન થયા અને વરદાન માંગવા કહ્યુ. પિપ્લાદે પોતાની દ્રષ્ટિથી કોઈપણ ને ભસ્મીભુત કરવાની શક્તિ માંગી.
હવે વરદાન મળ્યા પછી તરત પિપ્લાદે શનિદેવનું આહ્વાન  કરીને બોલાવ્યા અને પોતાની દ્રષ્ટિથી ભસ્મ કરવાનું ચાલુ કર્યુ.
બ્રહ્માંડમાં હાહાકાર થઈ ગયો. સૂર્ય પોતાના પુત્રને સળગતા જોઈને બ્રહ્માજી  પાસે ગયા ત્યારે બ્રહ્માજીએ આવીને બાળકને બહુ  સમજાવ્યો ને બીજા બે વરદાન માંગવા કહ્યું ત્યારે બાળકે શનિદેવને મુક્ત કર્યા.  
અને પહેલુ વરદાન માગ્યું કે કોઈપણ બાળકના જન્મ પછી પાંચ વર્ષ સુધી બાળકની કુંડલીમાં શનિ કોઈ પણ રીતે અસર ના કરવો જોઈએ  જેથી કરીને મારી જેમ બીજા દુઃખી ના થાય.
બીજુ મને પીપળાના ઝાડે જ  મોટો કર્યો છે એટલે જે કોઈ સુર્યોદય પહેલા પીપળાના ઝાડને પાણી ચઢાવશે તેને શનિની મહાદશાની અસર નહી થાય.  બહ્માજીએ  તથાસ્તુ કહ્યું. 

પિપ્લાદે પોતાના બ્રહ્મદંડથી શનિદેવના પગ પર વાર કર્યો અને મુક્ત કર્યા  ત્યારથી  શનિદેવ ની ચાલ ધીમી થઈ ને 
" શનૈ: ચરતિ ય:  શનૈશ્વર: " જે ધીમે ચાલે છે તે  શનેશ્વર કહેવાણા અને આગને લીધે  તેમનું શરીર કાળુ થઈ ગયુ,  શનિદેવની કાળી મૂર્તિ અને પીપળાની પુજાનો ધાર્મિક હેતુ આ છે. આગળ જઈ ને પિપ્લાદે  પ્રશ્ન ઉપનિષદની  રચના કરી  જે આજે પણ જ્ઞાનનો ભંડાર  મનાય છે, પીપળો 24 કલાક ઓક્સિજન, પ્રાણવાયુ  કાઢે છે ભગવાન વિષ્ણુએ વૃક્ષમાં હું પીપળો છું એવુ કહ્યું છે અને આપણે પીપળાને ભૂતની સાથે જોડી દીધો.

ચિરાગ મહારાજ

व्यतिपात योग

*व्यतिपात योग* 
 *व्यतिपात योग की ऐसी महिमा है कि उस समय जप पाठ प्राणायम, माला से जप या मानसिक जप करने से भगवान की और विशेष कर भगवान सूर्यनारायण की प्रसन्नता ओर कृपा प्राप्त होती है जप करने वालों को, व्यतिपात योग में जो कुछ भी किया जाता है उसका १ लाख गुना फल मिलता है।*
 *वाराह पुराण में ये बात आती है व्यतिपात योग की।*
 *व्यतिपात योग मतलब क्या?.. देवताओं के गुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी तारा पर चन्द्र देव की गलत नजर थी जिसके कारण सूर्य देव अप्रसन्न हुए नाराज हुए, उन्होनें चन्द्रदेव को समझाया पर चन्द्रदेव ने उनकी बात को अनसुना कर दिया तो सूर्य देव को दुःख हुआ कि मैने इनको सही बात बताई फिर भी ध्यान नही दिया और सूर्यदेव को अपने गुरुदेव की याद आई कि गुरुदेव के लिये आदर प्रेम श्रद्धा होना चाहिये पर इसको इतना याद नही थोडा भूल कर रहा है ये, सूर्यदेव को गुरुदेव की याद आई और आँखों से आँसु बहे वो समय व्यतिपात योग कहलाया है। और उस समय किया हुआ जप, सुमिरन, पाठ, प्रायाणाम, गुरुदर्शन की खूब महिमा बताई है वाराह पुराण में।*
 *विशेष ~ 10 फरवरी 2021 बुधवार को सुबह 07:03 से 11 फरवरी प्रातः 05:09 तक (यानी 10 फरवरी पुरा दिन) व्यतीपात योग है।*
चिराग महाराज