Shastriji

Monday, 24 May 2021

नए गांव का निर्माण


कोई भी नया गांव बनता था उस वक्त क्या-क्या चीजें ध्यान में रखते थे ऋषि परंपरा के हिसाब से आइए देखते हैं
हमने आपको पहले बता दिया है कोई भी काम हो पहले गणपति जी को याद किया जाता है

गांव बनने में भी गणपति जी तो होता ही है
परंतु गणपति जी का 5 गुणों को ध्यान में रखते हुए गांव का निर्माण होता है

आइए देखते हैं गणपति जी के पांच गुण कौन से हैं

बलवान, गुणवान, धनवान, प्रत्तिष्ठावान और बुद्धिमान 

बलवान का मतलब वर्ण के हिसाब से देखे
क्षत्रिय वह बलवान है जो प्रजा का रक्षण और प्रजा का भला सोचने वाले लोग हैं तो इसलिए गांव मैं क्षत्रिय का होना आवश्यक है और होना भी चाहिए क्योंकि वह हमारा ख्याल रख सके और हमारा रक्षण कर सकें, गणपतिजी का १ गुण सम्पन्न हुआ।

गुणवान का मतलब वर्ण के हिसाब से देखे ब्राह्मण है जो गांव में शिक्षा, ज्ञान, आध्यात्मिकता, यज्ञ, शस्त्र विद्या शास्त्र विद्या ऐसे कई गुणों से सर्व वर्ण को शिक्षा से संपन्न करता है और सबको जोड़े रखता है और गांव की अर्थव्यवस्था को संभाल के रखता है इसीलिए गांव में पंडित होना आवश्यक है गणपत जी का यह २ गुण संपन्न हुआ

धनवान का मतलब वर्ण के हिसाब देखे वैश्य होता है जो धनवान होते हैं और गांव में व्यापार जैसे कि आयात और निकास का काम करते हैं जैसे कि हमारे गांव में बनने वाली चीजें पकने वाली चीजें बाहर भेजना और बाहर की चीजें हमारे गांव में लाना यह काम वैश्य करते हैं इसीलिए गांव में वैश्य यानी की बनियां होना आवश्यक है गणपति जी का यह ३ गुण संपन्न हुआ। 

प्रतिष्ठावान का मतलब वर्ण के हिसाब से देखें तो राजा, मुखिया, सरपंच, मंत्री, होता है जो गांव को न्याय प्रदान करते हैं सही गलत का फैसला करते हैं और सब उनकी बात को अपने सर आंखों पर रखते हैं जो धर्मवान होते हैं धर्म के हिसाब से न्याय करते हैं आसपास के क्षेत्र में उसकी पहचान होती है जिसकी वजह से वह गांव की मदद कर सकते हैं और गांव को आगे बढ़ा सकते हैं इसीलिए प्रतिष्ठावान नागरिक होना आवश्यक है गणपति जी का यह ४ गुण संपन्न हुआ।

बुद्धिमान का मतलब होता है बुद्धिशाली इंसान कोई भी हो सकता है गांव में एक ऐसा होना जरूरी है जिससे हमारे गांव की कोई भी परिस्थिति हो उसमें दिमाग लगाकर अपनी बुद्धि का प्रदर्शन करते हैं अपने गांव का हित सोचेते हैं
वैश्य और पंडित बुद्धि लगाने में ज्यादा अग्रणी होते थे मगर ऐसा नहीं कि कोई और बुद्धिशाली नहीं होता कोई भी हो सकता है इसीलिए गांव में बुद्धिशाली होना आवश्यक है गणपति जी का यह ५ गुण संपन्न हुआ ।

देखा आपने कोई भी गांव बनता था तो उसमें भी गणपति पूजा होती थी मुहूर्त देखा जाता था गांव में शुद्धिकरण होता था वास्तु होता था ग्रह शांति भी होती थी और सब जाति के लोग होते थे पहले के टाइम में यह जातिवाद नहीं था सब साथ में जूड़कर रहते थे और एक दूसरे का साथ देते थे क्योंकि सबको पता है हमें सब की जरूरत है इसीलिए कभी झगड़ा नहीं होता था और जातिवाद नहीं होता था

शास्त्रीजी चिरागभाई राज्यगुरु